श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  12.320.67 
तथार्हतस्ततश्च त्वं दृष्टिं स्वां प्रतिमुञ्चसि।
मत्पक्षप्रतिघाताय स्वपक्षोद्भावनाय च॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
आप बार-बार मेरी ओर की पराजय और अपनी ओर की विजय के लिए सभा के इन माननीय सदस्यों की ओर दृष्टि डाल रहे हैं।
 
You are repeatedly casting your glance on these honourable members of the assembly for the defeat of my side and the victory of your side. 67.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)