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mahabharat 12.320.66: तुम अपनी विजय चाहते हो। तुमने न केवल मुझे जीतना चाहा है, बल्कि मेरी इस पूरी सभा को भी जीतना चाहा है।   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  12.320.66 
न मय्येवाभिसंधिस्ते जयैषिण्या जये कृत:।
येयं मत्परिषत् कृत्स्ना जेतुमिच्छसि तामपि॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
तुम अपनी विजय चाहते हो। तुमने न केवल मुझे जीतना चाहा है, बल्कि मेरी इस पूरी सभा को भी जीतना चाहा है।
 
You want your victory. You have not only wished to win me over, but you also wish to win over this entire assembly of mine.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)