Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.320.61: मैं यह भी नहीं जानता कि आप मेरे ही गोत्र के हैं या किसी और गोत्र के। इसी प्रकार आप मेरे बारे में भी कुछ नहीं जानते। अतः मेरे गोत्र में प्रवेश करके आपने गोत्रसंस्कार नामक तीसरा दोष उत्पन्न कर दिया है। 61. | mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सगोत्रां वासगोत्रां वा न वेद त्वां न वेत्थ माम्।
सगोत्रमाविशन्त्यास्ते तृतीयो गोत्रसंकर:॥ ६१॥
अनुवाद
मैं यह भी नहीं जानता कि आप मेरे ही गोत्र के हैं या किसी और गोत्र के। इसी प्रकार आप मेरे बारे में भी कुछ नहीं जानते। अतः मेरे गोत्र में प्रवेश करके आपने गोत्रसंस्कार नामक तीसरा दोष उत्पन्न कर दिया है। 61.
I do not even know whether you are from the same gotra or other gotra. Similarly, you also do not know anything about me. Therefore, by entering my gotra, you have created the third defect called gotrasankar. 61.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥