Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.320.59: तुम वर्णों में श्रेष्ठ ब्राह्मणों की पुत्रियों में श्रेष्ठ हो। तुम ब्राह्मण हो और मैं क्षत्रिय; अतः हम दोनों का एक साथ रहना कदापि उचित नहीं है; अतः तुम्हें वर्णसंकर नामक दोष उत्पन्न नहीं करना चाहिए। 59.   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  12.320.59 
वर्णप्रवरमुख्यासि ब्राह्मणी क्षत्रियस्त्वहम्।
नावयोरेकयोगोऽस्ति मा कृथा वर्णसंकरम्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
तुम वर्णों में श्रेष्ठ ब्राह्मणों की पुत्रियों में श्रेष्ठ हो। तुम ब्राह्मण हो और मैं क्षत्रिय; अतः हम दोनों का एक साथ रहना कदापि उचित नहीं है; अतः तुम्हें वर्णसंकर नामक दोष उत्पन्न नहीं करना चाहिए। 59.
 
You are the foremost among the daughters of the Brahmins who are the best among the Varnas. You are a Brahmin and I am a Kshatriya; therefore it is never proper for both of us to unite together; therefore you should not create the defect called Varnasankar. 59.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)