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mahabharat 12.320.58: तू किस कारण से मेरे राज्य या नगर में आया है अथवा किसके संकेत से मेरे हृदय में आया है? ॥58॥   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  12.320.58 
प्रवेशस्ते कृत: केन मम राष्ट्रे पुरेऽपि वा।
कस्य वा संनिकर्षात् त्वं प्रविष्टा हृदयं मम॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
तू किस कारण से मेरे राज्य या नगर में आया है अथवा किसके संकेत से मेरे हृदय में आया है? ॥58॥
 
For what reason have you entered my kingdom or city or by whose signal have you entered my heart? ॥ 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)