Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.320.57: तूने स्वभावतः ही बहुत सोच-विचारकर मेरे पूर्व शरीर का आश्रय लेने का प्रयत्न किया है। अतः तूने मेरी शरण लेकर मेरे शरीर में प्रवेश करके जो भूल की है, वह मैं तुझे बताता हूँ। कृपया सुनो॥ 57॥ | mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तूने स्वभावतः ही बहुत सोच-विचारकर मेरे पूर्व शरीर का आश्रय लेने का प्रयत्न किया है। अतः तूने मेरी शरण लेकर मेरे शरीर में प्रवेश करके जो भूल की है, वह मैं तुझे बताता हूँ। कृपया सुनो॥ 57॥
You have naturally, after careful consideration, tried to take shelter of my previous body. So, I will tell you about the mistake you have made by taking shelter of my side and entering my body. Please listen. ॥ 57॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥