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mahabharat 12.320.52: मोक्षरूपी पत्थर पर घिसकर धारदार की गई त्याग और वैराग्यरूपी तलवार से मैंने राज्य और धनरूपी पाश को तथा प्रेम में आश्रय पाए हुए स्त्री, पुत्र आदि के स्नेहरूपी बंधनों को काट डाला है॥52॥   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  12.320.52 
राज्यैश्वर्यमय: पाश: स्नेहायतनबन्धन:।
मोक्षाश्मनिशितेनेह च्छिन्नस्त्यागासिना मया॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
मोक्षरूपी पत्थर पर घिसकर धारदार की गई त्याग और वैराग्यरूपी तलवार से मैंने राज्य और धनरूपी पाश को तथा प्रेम में आश्रय पाए हुए स्त्री, पुत्र आदि के स्नेहरूपी बंधनों को काट डाला है॥52॥
 
With the sword of renunciation and dispassion, sharpened by rubbing it on the stone of salvation, I have cut the noose of kingdom and wealth and the bonds of affection of the wife, son etc. who are sheltered in love. 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)