Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.320.51: अतः धर्म, अर्थ, काम और राज्य प्राप्तिरूपी बन्धनों में निवास करने पर भी तुम मुझे बन्धन से मुक्त (जीवन्मुक्त में स्थित) समझो ॥51॥ | mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्माद् धर्मार्थकामेषु तथा राज्यपरिग्रहे।
बन्धनायतनेष्वेषु विद्धॺबन्धे पदे स्थितम्॥ ५१॥
अनुवाद
अतः धर्म, अर्थ, काम और राज्य प्राप्तिरूपी बन्धनों में निवास करने पर भी तुम मुझे बन्धन से मुक्त (जीवन्मुक्त में स्थित) समझो ॥51॥
Therefore, even though I am residing in the places of bondage of Dharma, Artha, Kama and attainment of kingdom, you should consider me to be free of bondage (established in Jivanmukta) ॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥