श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  12.320.49 
अथवा दु:खशैथिल्यं वीक्ष्य लिङ्गे कृता मति:।
किं तदेवार्थसामान्यं छत्रादिषु न लक्ष्यते॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
अथवा यदि ऐसा कहा जाए कि त्रिदण्ड और भगवा वस्त्र धारण करने से कुछ सुविधा प्राप्त होती है और दुःख कम होता है, अतः संन्यासियों ने उन चिह्नों को धारण करने का निश्चय किया है, तो फिर छत्र आदि धारण करते समय इस सामान्य प्रयोजन को ध्यान में क्यों न रखा जाए?॥49॥
 
Or, if it is said that by wearing the tri-danda and saffron clothes, some convenience is obtained and pain is reduced, and therefore, the sanyasis have decided to wear those symbols, then why should this general purpose not be kept in mind while wearing the umbrella, etc.?॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)