यदि सत्यपि लिङ्गेऽस्मिन् ज्ञानमेवात्र कारणम्।
निर्मोक्षायेह दु:खस्य लिङ्गमात्रं निरर्थकम्॥ ४८॥
अनुवाद
यदि इन चिह्नों के होते हुए भी यहाँ दुःखों से पूर्ण मुक्ति पाने का एकमात्र साधन ज्ञान ही है, तो धारण किए हुए सभी चिह्न व्यर्थ हैं ॥48॥
If, despite these signs, the only means of attaining total liberation from suffering here is knowledge, then all the signs that are worn are useless. ॥ 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥