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mahabharat 12.320.47: मेरा मानना ​​है कि भगवा वस्त्र पहनना, सिर झुकाना, त्रिशूल और कमण्डलु धारण करना - ये सब उत्तम त्याग के मार्ग के प्रतीक मात्र हैं। इनसे मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती।   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  12.320.47 
काषायधारणं मौण्डॺं त्रिविष्टब्धं कमण्डलुम्।
लिङ्गान्युत्पथभूतानि न मोक्षायेति मे मति:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
मेरा मानना ​​है कि भगवा वस्त्र पहनना, सिर झुकाना, त्रिशूल और कमण्डलु धारण करना - ये सब उत्तम त्याग के मार्ग के प्रतीक मात्र हैं। इनसे मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती।
 
I believe that wearing saffron clothes, bowing one's head and wearing the trident and kamandalu - all these are mere symbols indicating the path of excellent renunciation. Salvation is not achieved through these.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)