जो गृहस्थ जीवन में दोष देखकर उसे त्यागकर दूसरे जीवन में चला जाता है, वह भी कुछ त्यागता है और कुछ ग्रहण करता है; इसलिए वह भी संगति के दोषों से मुक्त नहीं होता ॥ 44॥
He who, seeing faults in the household life, abandons it and goes to another life, he too gives up something and accepts something; hence, he too does not get rid of the faults of association. ॥ 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥