Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.320.43: मनुष्य को अपने अभीष्ट लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जिस भी साधन की आवश्यकता होती है, वह अपने-अपने कार्य की सिद्धि के लिए उन-उन वस्तुओं का आश्रय लेता है ॥ 43॥ | mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मनुष्य को अपने अभीष्ट लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जिस भी साधन की आवश्यकता होती है, वह अपने-अपने कार्य की सिद्धि के लिए उन-उन वस्तुओं का आश्रय लेता है ॥ 43॥
Whichever human being needs whatever means to achieve his desired goal, he takes recourse to those objects to accomplish his respective task. ॥ 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥