Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.320.31: मेरा मोह नष्ट हो गया है। मैंने समस्त आसक्तियों का त्याग कर दिया है; अतः इस गृहस्थ जीवन में रहते हुए मैंने बुद्धि की परम स्वतंत्रता प्राप्त कर ली है ॥31॥ | mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मेरा मोह नष्ट हो गया है। मैंने समस्त आसक्तियों का त्याग कर दिया है; अतः इस गृहस्थ जीवन में रहते हुए मैंने बुद्धि की परम स्वतंत्रता प्राप्त कर ली है ॥31॥
My delusion has been dispelled. I have renounced all attachments; therefore, while living in this household life, I have attained the ultimate freedom of the intellect. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥