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mahabharat 12.320.30: मनुष्य ज्ञान के द्वारा मोक्ष प्राप्ति का प्रयत्न करता है। उस प्रयत्न से उसे महान् आत्मज्ञान प्राप्त होता है। वह महान् आत्मज्ञान ही सुख-दुःख आदि द्वन्द्वों से छुटकारा पाने का साधन है, यही एकमात्र सिद्धि है जो काल (मृत्यु) से भी परे है। 30॥   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.320.30 
ज्ञानेन कुरुते यत्नं यत्नेन प्राप्यते महत्।
महद् द्वन्द्वप्रमोक्षाय सा सिद्धिर्या वयोऽतिगा॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य ज्ञान के द्वारा मोक्ष प्राप्ति का प्रयत्न करता है। उस प्रयत्न से उसे महान् आत्मज्ञान प्राप्त होता है। वह महान् आत्मज्ञान ही सुख-दुःख आदि द्वन्द्वों से छुटकारा पाने का साधन है, यही एकमात्र सिद्धि है जो काल (मृत्यु) से भी परे है। 30॥
 
Man tries to attain liberation through knowledge. Through that effort one attains great enlightenment. That great self-knowledge is the means to get rid of the dualities like happiness and sorrow, it is the only accomplishment which transcends even time (death). 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)