श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.320.28 
सोऽहं तामखिलां वृत्तिं त्रिविधां मोक्षसंहिताम्।
मुक्तरागश्चराम्येक: पदे परमके स्थित:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
इस उपदेश को पाकर मैं सांसारिक भोगों की आसक्ति से मुक्त हो जाता हूँ और मोक्ष संबंधी तीनों प्रकार के कर्म करता हूँ तथा अकेला ही परम पद में स्थित रहता हूँ।
 
Having received this instruction, I become free from attachment to worldly pleasures and perform all the three kinds of activities related to liberation and alone remain situated in the supreme position.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)