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mahabharat 12.320.27: वे सांख्यशास्त्र के महान विद्वान हैं और सम्पूर्ण सिद्धान्त को प्रत्यक्ष ज्ञान के समान यथार्थ रूप में जानते हैं। उन्होंने मुझे तीन प्रकार के मोक्ष धर्म का श्रवण कराया है, किन्तु राज्य छोड़ने की अनुमति नहीं दी है॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.320.27 
तेनाहं सांख्यमुख्येन सुदृष्टार्थेन तत्त्वत:।
श्रावितस्त्रिविधं मोक्षं न च राज्याद्धि चालित:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
वे सांख्यशास्त्र के महान विद्वान हैं और सम्पूर्ण सिद्धान्त को प्रत्यक्ष ज्ञान के समान यथार्थ रूप में जानते हैं। उन्होंने मुझे तीन प्रकार के मोक्ष धर्म का श्रवण कराया है, किन्तु राज्य छोड़ने की अनुमति नहीं दी है॥ 27॥
 
He is a great scholar of Sankhya Shastra and he knows the entire theory in its true form as if by direct perception. He has made me listen to the three types of Moksha Dharma, but has not given me permission to leave the kingdom.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)