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mahabharat 12.320.26: पूर्वकाल में ऐसा हुआ था कि आचार्य चरण शास्त्रविहित मार्ग का अनुसरण करते हुए भ्रमण करते हुए यहाँ आए और वर्षा ऋतु में चार महीने तक मेरे साथ सुखपूर्वक रहे॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.320.26 
स यथाशास्त्रदृष्टेन मार्गेणेह परिभ्रमन्।
वार्षिकांश्चतुरो मासान् पुरा मयि सुखोषित:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में ऐसा हुआ था कि आचार्य चरण शास्त्रविहित मार्ग का अनुसरण करते हुए भ्रमण करते हुए यहाँ आए और वर्षा ऋतु में चार महीने तक मेरे साथ सुखपूर्वक रहे॥ 26॥
 
It happened in the past when Aacharya Charan, following the path prescribed by the scriptures, came here while wandering and stayed happily with me for four months during the rainy season.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)