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सांख्यज्ञाने च योगे च महीपालविधौ तथा।
त्रिविधे मोक्षधर्मेऽस्मिन् गताध्वा छिन्नसंशय:॥ २५॥
अनुवाद
सांख्यज्ञान, योगविद्या और राजधर्म - इन तीन प्रकार के मोक्षधर्मों में मुझे गुरुदेव से अपने गंतव्य का मार्ग प्राप्त हुआ है। इन विषयों के संबंध में मेरे सभी संदेह दूर हो गए हैं।
Sankhyagyan, Yogavidya and Rajdharma - in these three types of Mokshadharma, I have received the path to my destination from Gurudev. All my doubts regarding these subjects have been dispelled.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥