श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.320.20 
जनक उवाच
भगवत्या: क्व चर्येयं कृता क्व च गमिष्यसि।
कस्य च त्वं कुतो वेति पप्रच्छैनां महीपति:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जनक ने पूछा- भगवती ! आपने यह संन्यास दीक्षा कहाँ से प्राप्त की है, आप कहाँ जाएँगी ? आप किसकी हैं और कहाँ से शुभ रूप से यहाँ पधारीं ? राजा जनक ने सुलभा से ये सब बातें पूछीं ॥ 20॥
 
Janaka asked- Bhagwati! From where did you receive this initiation into Sannyas, where will you go? Whose are you and from where did you come here auspiciously? King Janaka asked all these things from Sulabha.॥ 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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