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mahabharat 12.320.191: जैसे कोई साधु किसी नगर में किसी निर्जन घर में एक रात बिताता है, वैसे ही मैं आज रात तुम्हारे शरीर में रहूँगा ॥191॥   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 191
 
 
श्लोक  12.320.191 
यथा शून्ये पुरागारे भिक्षुरेकां निशां वसेत्।
तथाहं त्वच्छरीरेऽस्मिन्निमां वत्स्यामि शर्वरीम्॥ १९१॥
 
 
अनुवाद
जैसे कोई साधु किसी नगर में किसी निर्जन घर में एक रात बिताता है, वैसे ही मैं आज रात तुम्हारे शरीर में रहूँगा ॥191॥
 
Just as a hermit spends one night in an empty house in a city, similarly I will stay in your body tonight. ॥191॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)