श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 190
 
 
श्लोक  12.320.190 
न वर्गस्था ब्रवीम्येतत् स्वपक्षपरपक्षयो:।
मुक्तो व्यायच्छते यश्च शान्तौ यश्च न शाम्यति॥ १९०॥
 
 
अनुवाद
मैं पक्षपातपूर्वक यह बात नहीं कह रहा हूँ, चाहे मैं अपने पक्ष में हूँ या दूसरे के पक्ष में; मैं आपके हित को ध्यान में रखकर कह रहा हूँ; क्योंकि जो अपने वचनों का प्रयोग नहीं करता और जो शान्त परमात्मा में लीन रहता है, वही मुक्त है ॥190॥
 
I am not saying this with partiality, being situated on my side either on my own side or the other's side; I am speaking keeping your welfare in mind; because he who does not exercise his words and who remains immersed in the tranquil Supreme Being, he alone is free. ॥190॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)