Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.320.190: मैं पक्षपातपूर्वक यह बात नहीं कह रहा हूँ, चाहे मैं अपने पक्ष में हूँ या दूसरे के पक्ष में; मैं आपके हित को ध्यान में रखकर कह रहा हूँ; क्योंकि जो अपने वचनों का प्रयोग नहीं करता और जो शान्त परमात्मा में लीन रहता है, वही मुक्त है ॥190॥ | mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न वर्गस्था ब्रवीम्येतत् स्वपक्षपरपक्षयो:।
मुक्तो व्यायच्छते यश्च शान्तौ यश्च न शाम्यति॥ १९०॥
अनुवाद
मैं पक्षपातपूर्वक यह बात नहीं कह रहा हूँ, चाहे मैं अपने पक्ष में हूँ या दूसरे के पक्ष में; मैं आपके हित को ध्यान में रखकर कह रहा हूँ; क्योंकि जो अपने वचनों का प्रयोग नहीं करता और जो शान्त परमात्मा में लीन रहता है, वही मुक्त है ॥190॥
I am not saying this with partiality, being situated on my side either on my own side or the other's side; I am speaking keeping your welfare in mind; because he who does not exercise his words and who remains immersed in the tranquil Supreme Being, he alone is free. ॥190॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥