Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.320.19: फिर छत्र आदि राजचिह्नों से रहित राजा जनक और एक ही शरीर में रहते हुए त्यागरूपी तीन दण्डों से मुक्त सुलभा के बीच जो वार्तालाप हुआ, उसे सुनो॥19॥   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.320.19 
तदेकस्मिन्नधिष्ठाने संवाद: श्रूयतामयम्।
छत्रादिषु विमुक्तस्य मुक्तायाश्च त्रिदण्डके॥ १९॥
 
 
अनुवाद
फिर छत्र आदि राजचिह्नों से रहित राजा जनक और एक ही शरीर में रहते हुए त्यागरूपी तीन दण्डों से मुक्त सुलभा के बीच जो वार्तालाप हुआ, उसे सुनो॥19॥
 
Then listen to the conversation that took place between King Janaka, who was devoid of the royal insignia like umbrella etc., and Sulabha, who was freed from the three-rodded symbol of renunciation, while living in the same body.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)