श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 186
 
 
श्लोक  12.320.186 
साहं तस्मिन् कुले जाता भर्तर्यसति मद्विधे।
विनीता मोक्षधर्मेषु चराम्येका मुनिव्रतम्॥ १८६॥
 
 
अनुवाद
मैं उस महान कुल में उत्पन्न हुई हूँ। जब मुझे योग्य वर नहीं मिला, तब मैंने मोक्ष धर्म सीखा और मुनि व्रत धारण करके अकेली ही विचरण करती हूँ।
 
I was born in that great family. When I could not find a suitable husband, I learnt the Dharma of Moksha and after adopting the vow of a sage, I roam around alone.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)