Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.320.182: सब आश्रम पृथक् हैं और चारों वर्ण भी पृथक् हैं। जब उनमें भेद है, तो उस भेद को जाननेवाला मनुष्य तुम्हारे वर्ण का संकर कैसे हो सकता है?॥182॥ | mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पृथक्त्वादाश्रमाणां च वर्णान्यत्वे तथैव च।
परस्परपृथक्त्वाच्च कथं ते वर्णसंकर:॥ १८२॥
अनुवाद
सब आश्रम पृथक् हैं और चारों वर्ण भी पृथक् हैं। जब उनमें भेद है, तो उस भेद को जाननेवाला मनुष्य तुम्हारे वर्ण का संकर कैसे हो सकता है?॥182॥
All the ashramas are separate and the four varnas are also different. When there is a separation between them, then how can a person who knows the separateness be a hybrid of your varna?॥182॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥