श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 172
 
 
श्लोक  12.320.172 
कुले महति जातेन ह्रीमता दीर्घदर्शिना।
नैतत्सदसि वक्तव्यं सद्वाऽसद्वा मिथ: कृतम्॥ १७२॥
 
 
अनुवाद
आप एक कुलीन कुल में जन्मे, विनम्र और दूरदर्शी व्यक्ति हैं। हमने एक-दूसरे के साथ जो कुछ अच्छा या बुरा किया है, उसे आपको इस सभा में नहीं बताना चाहिए। 172।
 
You are a man born in a noble family, modest and far-sighted. Whatever good or bad we have done to each other, you should not tell about it in this gathering. 172.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)