श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 171
 
 
श्लोक  12.320.171 
न पाणिभ्यां न बाहुभ्यां पादोरुभ्यां न चानघ।
न गात्रावयवैरन्यै: स्पृशामि त्वां नराधिप॥ १७१॥
 
 
अनुवाद
हे निष्पाप राजन! मैं आपको अपने हाथ, भुजा, पैर, जांघ या शरीर के किसी अन्य भाग से स्पर्श नहीं कर रही हूँ। (171)
 
O sinless king! I am not touching you with my hands, arms, feet, thighs or any other part of my body. 171.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)