श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 170
 
 
श्लोक  12.320.170 
नियमो ह्येषु वर्णेषु यतीनां शून्यवासिता।
शून्यमावेशयन्त्या च मया किं कस्य दूषितम्॥ १७०॥
 
 
अनुवाद
सभी जातियों में यह प्रसिद्ध नियम है कि तपस्वियों को एकान्त स्थानों में रहना चाहिए। मैंने आपके शून्य शरीर में निवास करके किसकी संपत्ति को अपवित्र किया है?॥170॥
 
It is a well-known rule in all castes that ascetics should live in solitary places. Whose possessions have I polluted by living in your empty body?॥170॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)