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mahabharat 12.320.17: जब वे राजा जनक से प्रश्न करने के लिए तत्पर हुए, तब उन्होंने अपनी नेत्रों की किरणों से उनके मन को वश में कर लिया तथा योगबल से उनके मन को बांधकर उन्हें अपने वश में कर लिया।   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.320.17 
नेत्राभ्यां नेत्रयोरस्य रश्मीन् संयम्य रश्मिभि:।
सा स्म तं चोदयिष्यन्ती योगबन्धैर्बबन्ध ह॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जब वे राजा जनक से प्रश्न करने के लिए तत्पर हुए, तब उन्होंने अपनी नेत्रों की किरणों से उनके मन को वश में कर लिया तथा योगबल से उनके मन को बांधकर उन्हें अपने वश में कर लिया।
 
When he was ready to question King Janaka, he controlled the rays of his eyes with the rays of his eyes and by binding his mind with the power of yoga, he brought him under his control.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)