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mahabharat 12.320.169: यदि आप पूर्णतः स्वतंत्र हैं तो फिर मैंने अपनी बुद्धि के द्वारा आपमें प्रवेश करके आपके प्रति कौन सा अपराध किया है?॥169॥   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 169
 
 
श्लोक  12.320.169 
सत्त्वेनानुप्रवेशो हि योऽयं त्वयि कृतो मया।
किं तवापकृतं तत्र यदि मुक्तोऽसि सर्वश:॥ १६९॥
 
 
अनुवाद
यदि आप पूर्णतः स्वतंत्र हैं तो फिर मैंने अपनी बुद्धि के द्वारा आपमें प्रवेश करके आपके प्रति कौन सा अपराध किया है?॥169॥
 
If you are completely free, then what crime have I committed against you by entering into you through my intellect?॥ 169॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)