Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.320.168: इतना सब होने पर भी यदि तुम अभी भी 'विदेहराज', 'मिथिला के राजा' आदि सांसारिक नामों से पहचाने जा रहे हो तो तुम भी अन्य सामान्य मनुष्यों की तरह आसक्ति और बाधाओं से बंधे हुए हो ॥168॥ | mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इतना सब होने पर भी यदि तुम अभी भी 'विदेहराज', 'मिथिला के राजा' आदि सांसारिक नामों से पहचाने जा रहे हो तो तुम भी अन्य सामान्य मनुष्यों की तरह आसक्ति और बाधाओं से बंधे हुए हो ॥168॥
In spite of all this if you are still being recognized with worldly names such as 'Videhraja', 'King of Mithila' etc. then you are bound by attachment and obstructions like other ordinary men.॥ 168॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥