स्वदेहेनाभिषङ्गो मे कुत: परपरिग्रहे।
न मामेवंविधां युक्तामीदृशं वक्तुमर्हसि॥ १६४॥
अनुवाद
मुझे अपने शरीर में आसक्ति नहीं है, फिर दूसरे के शरीर में कैसे आसक्ति हो सकती है ? मुझ योग में तत्पर रहने वाली संन्यासिनी के विषय में आपको ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए ॥164॥
I don't have any attachment to my own body, then how can I have any attachment to someone else's body? You should not say such things about me, a Sanyasini, who is thus engaged in Yoga. 164॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥