श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 162
 
 
श्लोक  12.320.162 
योऽप्यत्र परमो धर्म: पवित्रं राजराज्ययो:।
पृथिवी दक्षिणा यस्य सोऽश्वमेधेन युज्यते॥ १६२॥
 
 
अनुवाद
यहाँ राजा और राज्य के लिए परम धर्म और परम पवित्र बात सुनो। जिसकी भूमि दक्षिणा में दी जाती है, अर्थात् जो अपना राज्य दान करता है, उसे अश्वमेध यज्ञ का पुण्य फल प्राप्त होता है।
 
Here listen to the supreme religion and the most sacred thing for the king and the kingdom. The one whose land is given as dakshina, that is, the one who donates his kingdom, he gets the virtuous result of Ashwamedha Yagna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)