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mahabharat 12.320.158: राज्य के सातों अंग समय-समय पर अपनी विशेषता सिद्ध करते रहते हैं। जो अंग किसी विशेष कार्य को करता है, वही उस कार्य का अधिष्ठाता माना जाता है।   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 158
 
 
श्लोक  12.320.158 
तेषु तेषु हि कालेषु तत्तदङ्गं विशिष्यते।
येन यत् सिध्यते कार्यं तत् प्राधान्याय कल्पते॥ १५८॥
 
 
अनुवाद
राज्य के सातों अंग समय-समय पर अपनी विशेषता सिद्ध करते रहते हैं। जो अंग किसी विशेष कार्य को करता है, वही उस कार्य का अधिष्ठाता माना जाता है।
 
All the seven organs of the state prove their speciality from time to time. The organ which performs a particular task is considered to be the leader for that task. 158
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)