Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.320.156-157: मित्र, मंत्री, नगर, राष्ट्र, दण्ड, कोष और राजा - ये राज्य के सात अंग हैं। जैसे मेरे हाथ में त्रिदण्ड है, वैसे ही यह राज्य तुम्हारे हाथ में है। तुम्हारा सात अंगों वाला राज्य और मेरा त्रिदण्ड - ये दोनों ही उत्तम गुणों से युक्त हैं। फिर इनमें से कौन किस गुण के कारण बड़ा है?॥156-157॥ | mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मित्र, मंत्री, नगर, राष्ट्र, दण्ड, कोष और राजा - ये राज्य के सात अंग हैं। जैसे मेरे हाथ में त्रिदण्ड है, वैसे ही यह राज्य तुम्हारे हाथ में है। तुम्हारा सात अंगों वाला राज्य और मेरा त्रिदण्ड - ये दोनों ही उत्तम गुणों से युक्त हैं। फिर इनमें से कौन किस गुण के कारण बड़ा है?॥156-157॥
Friends, ministers, cities, nations, punishment, treasury and king-these are the seven parts of a kingdom. Just as I have the tri-danda in my hand, similarly this kingdom is in your hands. Your kingdom with seven parts and my tri-danda-both of them are endowed with excellent qualities. Then which of these is greater due to which quality?॥156-157॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥