श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 152
 
 
श्लोक  12.320.152 
अमुक्तो मानसैर्दु:खैरिच्छाद्वेषभयोद्भवै:।
शिरोरोगादिभी रोगैस्तथैवाभिनियन्तृभि:॥ १५२॥
 
 
अनुवाद
इच्छा, द्वेष और भय से उत्पन्न मानसिक कष्ट राजा को कभी नहीं छोड़ता। सिर दर्द आदि शारीरिक रोग भी उसे बेचैन रखते हैं और सब ओर से वश में रखते हैं। 152.
 
Mental distress arising out of desire, hatred and fear never leaves the king. Physical ailments like headache etc. also keep him restless and keep him under control from all sides. 152.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)