Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.320.151: हाय! देश नष्ट हो गया, सारा नगर जल गया और प्रधान हाथी मर गया।' यद्यपि ये सब बातें सब लोगों के लिए सामान्य हैं - सब लोग समान रूप से इन कष्टों को भोगते हैं, तथापि राजा अपने मिथ्या ज्ञान के कारण इसे अपनी ही हानि मानकर दुःखी रहता है॥151॥   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 151
 
 
श्लोक  12.320.151 
हतो देश: पुरं दग्धं प्रधान: कुञ्जरो मृत:।
लोकसाधारणेष्वेषु मिथ्याज्ञानेन तप्यते॥ १५१॥
 
 
अनुवाद
हाय! देश नष्ट हो गया, सारा नगर जल गया और प्रधान हाथी मर गया।' यद्यपि ये सब बातें सब लोगों के लिए सामान्य हैं - सब लोग समान रूप से इन कष्टों को भोगते हैं, तथापि राजा अपने मिथ्या ज्ञान के कारण इसे अपनी ही हानि मानकर दुःखी रहता है॥151॥
 
'Alas! The country is destroyed, the entire city is ablaze and the chief elephant is dead.' Although all these things are normal for all people - everyone suffers these hardships equally, yet the king, due to his false knowledge, considers this to be his own loss and remains distressed.॥ 151॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)