श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 150
 
 
श्लोक  12.320.150 
पुत्रा दारास्तथैवात्मा कोशो मित्राणि संचया:।
परै: साधारणा ह्येते तैस्तैरेवास्य हेतुभि:॥ १५०॥
 
 
अनुवाद
स्त्री, पुत्र, शरीर, कोष, मित्र और सम्पत्ति - ये सब वस्तुएँ राजाओं के समान दूसरों में भी प्रायः विद्यमान रहती हैं। जिन कारणों से वह राजा कहलाता है, उन्हीं कारणों से दूसरे भी उसके समान कहे जा सकते हैं ॥150॥
 
Wife, son, body, treasury, friends and possessions - all these things are generally present in others also like in kings. For the same reasons due to which he is called a king, others can also be called like him by the same reasons.॥ 150॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)