Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.320.149: हे जनक! सभी अपने-अपने घर में राजा हैं और सभी अपने-अपने घर में स्वामी हैं। सभी किसी को दण्ड देते हैं और किसी पर दया करते हैं; इसलिए सभी राजा के समान हैं। 149. | mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सर्व: स्वे स्वे गृहे राजा सर्व: स्वे स्वे गृहे गृही।
निग्रहानुग्रहान् कुर्वंस्तुल्यो जनक राजभि:॥ १४९॥
अनुवाद
हे जनक! सभी अपने-अपने घर में राजा हैं और सभी अपने-अपने घर में स्वामी हैं। सभी किसी को दण्ड देते हैं और किसी पर दया करते हैं; इसलिए सभी राजा के समान हैं। 149.
O Janak! Everyone is a king in his own house and everyone is a master in his own house. Everyone punishes someone and shows mercy to someone; hence all of them are like kings. 149.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥