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mahabharat 12.320.148: हे राजन! जिन विद्वान् और शूरवीर पुरुषों के नाम मैंने कहे हैं, वे राजा को अपने प्रति भयभीत देखकर वास्तव में उसके प्रति द्वेष रखने लगते हैं, तब राजा को उनसे कैसा भय होता होगा, यह आप स्वयं ही समझ सकते हैं॥148॥   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 148
 
 
श्लोक  12.320.148 
तथा चैते प्रदुष्यन्ति राजन् ये कीर्तिता मया।
तथैवास्य भयं तेभ्यो जायते पश्य यादृशम्॥ १४८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! जिन विद्वान् और शूरवीर पुरुषों के नाम मैंने कहे हैं, वे राजा को अपने प्रति भयभीत देखकर वास्तव में उसके प्रति द्वेष रखने लगते हैं, तब राजा को उनसे कैसा भय होता होगा, यह आप स्वयं ही समझ सकते हैं॥148॥
 
O King! The learned and valiant men whose names I have mentioned, on seeing the king's apprehension towards them, actually start harbouring ill-will towards him, and then you can yourself understand the kind of fear the king gets from them.॥ 148॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)