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mahabharat 12.320.147: जब वह विद्वानों, योद्धाओं और धनवानों को एक स्थान पर एकत्रित देखता है, तो उन पर संदेह करने लगता है । राजा उन स्थानों से भी डरता है जहाँ भय का कोई कारण नहीं है । वह उन लोगों के प्रति भी संशयग्रस्त रहता है जो सदैव उसके आस-पास रहते हैं या उसकी सेवा करते हैं ॥147॥   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 147
 
 
श्लोक  12.320.147 
प्राज्ञान् शूरांस्तथैवाढॺानेकस्थानपि शङ्कते।
भयमप्यभये राज्ञो यैश्च नित्यमुपास्यते॥ १४७॥
 
 
अनुवाद
जब वह विद्वानों, योद्धाओं और धनवानों को एक स्थान पर एकत्रित देखता है, तो उन पर संदेह करने लगता है । राजा उन स्थानों से भी डरता है जहाँ भय का कोई कारण नहीं है । वह उन लोगों के प्रति भी संशयग्रस्त रहता है जो सदैव उसके आस-पास रहते हैं या उसकी सेवा करते हैं ॥147॥
 
When he sees learned men, warriors and rich people gathered at one place, he starts suspecting them. The king fears even those places where there is no reason to fear. He remains suspicious of those people who are always around him or who serve him.॥ 147॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)