Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.320.143: वह सोना चाहता है, परन्तु अपने काम में व्यस्त लोगों से घिरा होने के कारण सो नहीं पाता। यहाँ तक कि अपने बिस्तर पर सो रहे राजा को भी प्रजा के अनुरोध पर उठना पड़ता है। | mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्वप्नकामो न लभते स्वप्तुं कार्यार्थिभिर्जनै:।
शयने चाप्यनुज्ञात: सुप्त उत्थाप्यतेऽवश:॥ १४३॥
अनुवाद
वह सोना चाहता है, परन्तु अपने काम में व्यस्त लोगों से घिरा होने के कारण सो नहीं पाता। यहाँ तक कि अपने बिस्तर पर सो रहे राजा को भी प्रजा के अनुरोध पर उठना पड़ता है।
He wants to sleep, but is unable to do so because he is surrounded by people who are busy with their work. Even the king sleeping on his bed is forced to get up at the request of the people. 143.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥