श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 141
 
 
श्लोक  12.320.141 
स्त्रीषु क्रीडाविहारेषु नित्यमस्यास्वतन्त्रता।
मन्त्रे चामात्यसमितौ कुतस्तस्य स्वतन्त्रता॥ १४१॥
 
 
अनुवाद
वह अपनी पत्नी के साथ, खेलकूद में और मनोरंजन में भी सदैव पराधीन रहता है। यहाँ तक कि मंत्रियों की सभा में बैठकर उनसे परामर्श करते समय भी उसे स्वतंत्रता नहीं होती।
 
He is always dependent even in the company of his wife, in sports and in entertainment. Even while sitting in the assembly of ministers and conferring with them, he has no freedom. 141.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)