Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.320.135: हे राजन! मोक्ष की शरण में आकर भी तुमने ये तथा अन्य सूक्ष्म आसक्ति के बिन्दु चारों अंगों में रखे हैं। मैं तुम्हें उनके विषय में बता रहा हूँ। कृपया मेरी बात सुनो। ॥135॥ | mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इमान्यन्यानि सूक्ष्माणि मोक्षमाश्रित्य कानिचित् ।
चतुरङ्गप्रवृत्तानि सङ्गस्थानानि मे शृणु॥ १३५॥
अनुवाद
हे राजन! मोक्ष की शरण में आकर भी तुमने ये तथा अन्य सूक्ष्म आसक्ति के बिन्दु चारों अंगों में रखे हैं। मैं तुम्हें उनके विषय में बता रहा हूँ। कृपया मेरी बात सुनो। ॥135॥
O King! Even after taking refuge in salvation, you have kept these and other subtle points of attachment in the four limbs as well. I am telling you about them. Please listen to me. ॥135॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥