Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.320.134: हे शत्रुओं का नाश करने वाले राजन! समस्त विषयों को आसक्ति के विषय समझकर, अपने द्वारा अपने आप को अपने में देखो। मुक्त पुरुष का इसके अतिरिक्त और क्या लक्षण हो सकता है?॥134॥ | mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे शत्रुओं का नाश करने वाले राजन! समस्त विषयों को आसक्ति के विषय समझकर, अपने द्वारा अपने आप को अपने में देखो। मुक्त पुरुष का इसके अतिरिक्त और क्या लक्षण हो सकता है?॥134॥
O king, destroyer of enemies! Considering all the various objects as objects of attachment, see yourself in yourself through yourself. What other sign can a liberated person have except this?॥134॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥