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mahabharat 12.320.132: उस मुक्त व्यक्ति का लक्षण क्या है जो सुखद और अप्रिय, कमजोर और बलवान के प्रति समान दृष्टि नहीं रखता?   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 132
 
 
श्लोक  12.320.132 
प्रिये वाप्यप्रिये वापि दुर्बले बलवत्यपि।
यस्य नास्ति समं चक्षु: किं तस्मिन्मुक्तलक्षणम्॥ १३२॥
 
 
अनुवाद
उस मुक्त व्यक्ति का लक्षण क्या है जो सुखद और अप्रिय, कमजोर और बलवान के प्रति समान दृष्टि नहीं रखता?
 
What is the sign of a liberated person who does not have an equal view of the pleasant and the unpleasant, the weak and the strong?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)