श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  12.320.129 
इदं मे स्यादिदं नेति द्वन्द्वैर्मुक्तस्य मैथिल।
कासि कस्य कुतो वेति वचनै: किं प्रयोजनम्॥ १२९॥
 
 
अनुवाद
हे मिथिलाराज! यदि आप 'मुझे यह मिले या मुझे वह न मिले' आदि द्वैत चिंताओं से मुक्त हैं, तो 'आप कौन हैं? किसके हैं? या आप कहाँ से आए हैं?' यह प्रश्न पूछने का क्या प्रयोजन है?॥129॥
 
O King of Mithila! If you are free from the dualistic worries that arise in the form of 'I should get this or I should not get that' etc. then what is the purpose of asking the question 'Who are you? Whose are you? Or where have you come from?'॥ 129॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)