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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना
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श्लोक 128
श्लोक
12.320.128
यद्यात्मनि परस्मिंश्च समतामध्यवस्यसि।
अथ मां कासि कस्येति किमर्थमनुपृच्छसि॥ १२८॥
अनुवाद
यदि तुम अपने और दूसरों के प्रति समभाव रखते हो, तो मुझसे बार-बार ‘तुम कौन हो और किसके हो?’ क्यों पूछते हो?॥128॥
If you have equanimity towards yourself and others, then why do you repeatedly ask me 'Who are you and whose are you?'॥ 128॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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