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mahabharat 12.320.126: जैसे सूर्य की किरणों के संपर्क में आने पर सूर्यमणि से अग्नि उत्पन्न होती है और जैसे लकड़ी के आपस में रगड़ने से अग्नि उत्पन्न होती है, वैसे ही पूर्वोक्त कलाओं के संयोग से जीव उत्पन्न होते हैं॥126॥   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 126
 
 
श्लोक  12.320.126 
यथाऽऽदित्यान्मणेश्चापि वीरुद्भॺश्चैव पावक:।
जायन्त्येवं समुदयात् कलानामिव जन्तव:॥ १२६॥
 
 
अनुवाद
जैसे सूर्य की किरणों के संपर्क में आने पर सूर्यमणि से अग्नि उत्पन्न होती है और जैसे लकड़ी के आपस में रगड़ने से अग्नि उत्पन्न होती है, वैसे ही पूर्वोक्त कलाओं के संयोग से जीव उत्पन्न होते हैं॥126॥
 
Just as fire emerges from a sun-stone gem on coming in contact with the rays of the sun, and just as fire emerges from wood on rubbing against each other, similarly, from the union of the aforesaid arts, living beings take birth.॥ 126॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)