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mahabharat 12.320.124-125: जैसे एक अच्छा दौड़ने वाला घोड़ा एक स्थान से निकलकर दूसरे स्थान पर इतने वेग से पहुँच जाता है कि कुछ कहना असम्भव हो जाता है, वैसे ही यह प्रभावशाली संसार निरन्तर एक अवस्था से दूसरी अवस्था में बड़े वेग से जा रहा है। अतः इसके विषय में यह प्रश्न नहीं उठाया जा सकता कि 'कौन कहाँ से आता है और कौन कहाँ से नहीं आता, कौन किसका है? कौन किसका नहीं है? वह किससे उत्पन्न हुआ है और किससे उत्पन्न नहीं हुआ? यहाँ जीवों का अपने शरीर के अंगों से क्या सम्बन्ध है?' अर्थात् कोई सम्बन्ध ही नहीं है। ॥124-125॥   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 124-125
 
 
श्लोक  12.320.124-125 
तस्याप्येवंप्रभावस्य सदश्वस्येव धावत:।
अजस्रं सर्वलोकस्य क: कुतो वा न वा कुत:॥ १२४॥
कस्येदं कस्य वा नेदं कुतो वेदं न वा कुत:।
सम्बन्ध: कोऽस्ति भूतानां स्वैरप्यवयवैरिह॥ १२५॥
 
 
अनुवाद
जैसे एक अच्छा दौड़ने वाला घोड़ा एक स्थान से निकलकर दूसरे स्थान पर इतने वेग से पहुँच जाता है कि कुछ कहना असम्भव हो जाता है, वैसे ही यह प्रभावशाली संसार निरन्तर एक अवस्था से दूसरी अवस्था में बड़े वेग से जा रहा है। अतः इसके विषय में यह प्रश्न नहीं उठाया जा सकता कि 'कौन कहाँ से आता है और कौन कहाँ से नहीं आता, कौन किसका है? कौन किसका नहीं है? वह किससे उत्पन्न हुआ है और किससे उत्पन्न नहीं हुआ? यहाँ जीवों का अपने शरीर के अंगों से क्या सम्बन्ध है?' अर्थात् कोई सम्बन्ध ही नहीं है। ॥124-125॥
 
Just as a good running horse leaves one place and reaches another place with such speed that it becomes impossible to say anything, similarly this influential world is constantly moving from one state to another with great speed. Therefore, the question cannot be raised about it that 'who comes from where and who does not come from where, who belongs to whom? Who does not belong to whom? From whom has it originated and from whom has it not originated? What is the relation of the living beings with their body parts here?' That is, there is no relation at all. ॥124-125॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)